रांची- पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब शहरों की डोर-टू-डोर डिलीवरी व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है. ऑनलाइन फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी से जुड़े गिग वर्कर्स का कहना है कि ईंधन खर्च तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन उनकी कमाई और इंसेंटिव में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई.
गिग वर्कर ने बताया कि पेट्रोल संकट की खबरें और बढ़ती कीमतों की वजह से बाजार में करीब 25 प्रतिशत तक गिरावट महसूस की जा रही है. उनका कहना है कि लोग अब गैरजरूरी ऑनलाइन ऑर्डर कम कर रहे हैं, जिससे कमाई भी प्रभावित हो रही है.
शहरों में बड़ी संख्या में लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ऑनलाइन सेवाओं पर निर्भर हैं. नौकरीपेशा लोग समय बचाने के लिए घर पर खाना और जरूरी सामान मंगाते हैं.
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छात्र पढ़ाई और हॉस्टल जीवन के कारण ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करते हैं, वहीं बुजुर्ग और बीमार लोग भी दवाइयों और आवश्यक वस्तुओं की होम डिलीवरी पर निर्भर रहते हैं. लेकिन पेट्रोल महंगा होने से डिलीवरी सेवाओं की रफ्तार प्रभावित होने लगी है.
डिलीवरी पार्टनर्स का कहना है कि उनकी कमाई पूरी तरह ऑर्डर की संख्या और तय लक्ष्य पर निर्भर करती है. उन्हें कोई निश्चित मासिक वेतन नहीं मिलता. हर सफल डिलीवरी पर एक बेस फीस दी जाती है, जबकि दूरी ज्यादा होने पर अतिरिक्त भुगतान मिलता है.
इसके अलावा, दिनभर में तय संख्या में ऑर्डर पूरा करने पर बोनस और पीक आवर में अतिरिक्त इंसेंटिव भी मिलता है. हालांकि, बढ़ते पेट्रोल खर्च के कारण अब यह कमाई पहले जैसी लाभदायक नहीं रह गई है.
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कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले जहां 20 से 30 मिनट में ऑर्डर पहुंच जाता था, अब उसमें अधिक समय लग रहा है. देर से डिलीवरी होने पर नौकरीपेशा लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है, जबकि छात्रों और बुजुर्गों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है.
इसके साथ ही शहर के कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन का स्टॉक खत्म होने की स्थिति भी सामने आ रही है. कई पंपों पर पेट्रोल नहीं मिलने से डिलीवरी पार्टनर्स को लंबी दूरी तय कर दूसरे इलाकों में जाना पड़ रहा है. इसका सीधा असर डिलीवरी समय पर पड़ रहा है और कई ऑर्डर तय समय से देर से पहुंच रहे हैं.
उन्होंने कहा कि ईंधन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती रही और गिग वर्कर्स की आय में संतुलित सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में डोर-टू-डोर सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता दोनों प्रभावित हो सकती हैं. फिलहाल, गिग वर्कर्स बढ़ते खर्च और घटती बचत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं.








