बिहार- बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर किए गए बड़े फर्जीवाड़े को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की है। ED की टीम ने जिला के कोटवा और डुमरिया घाट थाना क्षेत्र के दो अलग-अलग गांवों में एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया.
यह पूरी कार्रवाई रेलवे में नौकरी के नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध उगाही और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी बताई जा रही है। 2023 में दर्ज हुए केस के बाद अब ED इस मामले की जांच कर रही है
छापेमारी का मुख्य केंद्र कोटवा थाना क्षेत्र का अमवा गांव रहा। यहाँ ED की टीम ने रामू प्रसाद के पुत्र सक्षम कुमार के घर पर अहले सुबह धावा बोला। अधिकारियों ने घर के कोने-कोने की तलाशी ली और परिवार के सदस्यों से कड़ी पूछताछ की।
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लगभग 10 घंटे तक चली इस सघन जांच के बाद टीम देर शाम वापस लौटी। बताया जा रहा है कि सक्षम कुमार पर 2023 में रेलवे नौकरी फर्जीवाड़ा का मामला दर्ज हुआ था और वह इस मामले में पहले जेल भी जा चुका है।
कोटवा में कार्रवाई के साथ-साथ ED की एक टीम डुमरिया घाट थाना क्षेत्र के सेंभुआपुर गांव भी पहुंची। यहाँ टीम ने ललन तिवारी के पुत्र दीपक कुमार तिवारी के घर पर छापेमारी की कोशिश की, लेकिन घर पर ताला लटका मिला।
घर के सभी सदस्य मौके से गायब थे। टीम ने आसपास के लोगों और पड़ोसियों से दीपक तिवारी के बारे में पूछताछ की, लेकिन कोई ठोस जानकारी न मिलने पर टीम को वापस लौटना पड़ा। दीपक पर भी फर्जीवाड़े से जुड़े मामले दर्ज होने की बात सामने आ रही है।
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छापेमारी के दौरान ED की टीम ने मीडिया या ग्रामीणों को कुछ भी बताने से पूरी तरह परहेज किया। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, टीम ने सक्षम कुमार के घर से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं, जो वित्तीय लेन-देन और जालसाजी की कड़ियों को जोड़ने में मदद करेंगे। देर शाम टीम अपने साथ कुछ बैग और फाइलें लेकर रवाना हुई।








