डेस्क- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है जिसमें SIT जांच और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड पेश करने की मांग की गई है.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंज़ूरी के बिना भारत के चुनाव आयोग के नाम पर फ़ैसले लिए जा रहे हैं.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई सदस्यों वाली संस्था के तौर पर पोल पैनल को मिली शक्तियों का इस्तेमाल संविधान के आर्टिकल 324 और 2023 एक्ट के सेक्शन 18 के तहत तय सामूहिक फैसले लेने की प्रक्रिया का पालन किए बिना किया गया.
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राकेश कुमार सिंह उर्फ राकेश सिंह की इस जनहित याचिका में यह गुहार लगाई गई है कि निर्वाचन आयोग की संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल मल्टी-मेंबर बॉडी को ही करना चाहिए.
इसके कम्युनिकेशन, ऑर्डर, डायरेक्शन और अपील सिर्फ सेक्शन 18 के तहत तय एकमत से या मेजॉरिटी से लिए गए फैसलों के हिसाब से ही जारी किए जाने चाहिए।
याचिका में इलेक्शन कमीशन के ओरिजिनल रिकॉर्ड भी पेश करने की मांग की गई है, जिसमें मिनट्स, एजेंडा, अप्रूवल, फाइल नोटिंग, IT-एक्सेस रिकॉर्ड और इलेक्टोरल रोल, फॉर्म-6, ERONet/ECINet और वेस्ट बंगाल ट्रिब्यूनल के सामने अपील से जुड़े ऑडिट भी शामिल हैं.
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याचिका में फॉर्म-6 में जुलाई 2026 में किए गए बदलाव और कुछ दूसरी कार्रवाइयों को रद्द करने की मांग की गई है, साथ ही अगर रिकॉर्ड में बिना इजाज़त के फैसले लेने का खुलासा होता है तो ज्यूडिशियल कमीशन या SIT जांच कराने की भी मांग की गई है.
वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया और जल्द सुनवाई का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है, इसलिए इसके फैसले सामूहिक रूप से लिए जाने चाहिए.
सिंह ने दलील दी कि अगर आयोग ने किसी फैसले को सर्वसम्मति से नहीं लिया है, तो यह गंभीर मामला है. उनके मुताबिक, कानून के तहत बहु-सदस्यीय आयोग में फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर होने चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने SIR से जुड़े मामले को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है.








