पटना- बिहार के जमुई में सड़क पर बदसलूकी की पीड़ित के परिवार के फोटो शेयर करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है।
दरअसल, पीड़ित परिवार गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिला था। सम्राट चौधरी ने इस मुलाकात की तस्वीर एक्स हैंडल से बिना ब्लर किए फोटो शेयर की। हालांकि, 15 मिनट बाद इसे डिलिट कर दिया गया।
पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ऑफिशियल X हैंडल से एक पोस्ट शेयर हुआ। जिसमें लिखा- ‘लोकसेवक आवास में जमुई की पीड़ित बच्ची और उनके परिवार से मुलाकात की। बेटी को निर्भय होकर आगे बढ़ने और परिवार को शीघ्र न्याय का भरोसा दिलाया।
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परिवार ने भी पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताया। सभी दोषियों के विरुद्ध स्पीडी ट्रायल के माध्यम से एक माह के भीतर कठोरतम सजा सुनिश्चित की जाएगी।’
इसे लेकर तेजस्वी यादव ने कार्रवाई की मांग कर दी है। राजद सांसद मीसा भारती ने सम्राट चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज कराने सचिवालय थाने पहुंचीं।
राजद सांसद मीसा भारती सीएम सम्राट चौधरी के खिलाफ सचिवालय थाने में पॉस्को एक्ट की धारा धारा 23 और जुबनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 74 के तहत FIR दर्ज कराने पहुंचीं, लेकिन थाना प्रभारी ने प्राथमिकी दर्ज करने से मना कर दिया।
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मीसा भारती ने कहा कि गृह विभाग के मंत्री स्वयं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं, जिनके अनुसार कानून सबके लिए बराबर नहीं है। मुख्यमंत्री को लगता है कि वह कानून से ऊपर हैं।
जमुई मामले में वीडियो वायरल करने वाले 150 लोगों पर FIR की है। जमुई कांड के पीड़िता को सीएम पहचान उजागर की तो उनके खिलाफ केस क्यों दर्ज नहीं होगा।
बता दें सीएम की पीड़ित परिवार के साथ तस्वीर सामने आने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को घेरा। उन्होंने X पर लिखा, ‘नासमझ, अनाड़ी, कानून विरोधी बिहार के मुख्यमंत्री ख़ुद पॉक्सो एक्ट की धज्जियाँ उड़ा रहे है।
जमुई कांड की नाबालिग पीड़िता की परिजनों संग अपने सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर जारी कर पीड़िता की पहचान उजागर कर रहे है। POCSO एक्ट के तहत नाबालिग पीड़िता की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य है। पीड़िता के परिजनों के साथ तस्वीर साझा किए जाने से उसकी पहचान सार्वजनिक होने का खतरा पैदा हुआ।’








