पटना- बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (COMFED) ने सुधा ब्रांड के दूध और दुग्ध उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। नई दरें 25 मई 2026 से पूरे बिहार में लागू होंगी।
फेडरेशन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पशुपालकों से खरीदे जाने वाले दूध की कीमत बढ़ने, पैकेजिंग, पेट्रोलियम पदार्थ, बिजली और परिवहन लागत में इजाफे के कारण यह फैसला लिया गया है।
COMFED के मुताबिक, दूध की खरीद कीमत में 2 रुपये से लेकर 3.13 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर अब बाजार कीमतों पर भी दिखेगा। सबसे ज्यादा असर रोजाना दूध इस्तेमाल करने वाले परिवारों पर पड़ेगा।
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दूध के अलावा सुधा के कई अन्य उत्पादों की कीमतों में भी इजाफा किया गया है।
घी (1 लीटर) – इसके 1 टिन की कीमत 10 रुपये बढ़ोतरी के साथ 315 रुपये से बढ़कर 325 रुपये हो गया है।
पनीर (200 ग्राम) – यह 85 रुपये से बढ़कर 95 रुपये हो गई है। पनीर की कीमत में करीब 10 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
टेबल बटर (500 ग्राम) – यह 205 रुपये से बढ़कर 220 रुपये हो गई है। इसमें कुल 15 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है।
व्हाइट बटर (100 ग्राम) – यह 55 रुपये से बढ़कर 62 रुपये तक पहुंच गई है। इसके दाम 7 रुपये बढ़ी है।
मिठ्ठी दही (500 ग्राम) – यह 270 रुपये से बढ़कर 305 रुपये प्रति हो गई है। इसकी कीमत में 35 रुपये बढ़ात्तरी हुई है।
दही, लस्सी और फ्लेवर्ड ड्रिंक की कीमत भी बढ़ी
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दही (1 किलो) – इसकी कीमत 72 रुपये से बढ़कर 78 रुपये यानी 6 रुपये बढ़ी है।
लस्सी (140 एमएल) – इसके दाम 10 रुपये से बढ़कर 12 रुपये यानी 2 रुपये बढ़े हैं।
मस्तानी (140 एमएल) – इसके दाम 12 रुपये से बढ़कर 15 रुपये पहुंच गई। यानी 3 रुपये की बढ़ोतरी हुई।
पेडा / मिल्क केक कॉम्बो (250 ग्राम) – इसकी कीमतें 108 रुपये से बढ़कर 125 रुपये बढ़ गई है। यानी 17 रुपये बढ़ी है।
गुलाब जामुन और रसगुल्ला भी महंगे
गुलाब जामुन के 1 किलो टिन की कीमत 240 रुपये से बढ़कर 250 रुपये हो गई है। इसमें सीधे 10 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। रसगुल्ला के 1 किलो टिन की कीमत 220 रुपये से बढ़कर 240 रुपये हो गई है। इसमें भी 20 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।गुलाब जामुन और रसगुल्ला मिक्स के 1 किलो टिन की कीमत 230 रुपये से बढ़कर 250 रुपये हो गई है। इसमें 20 रुपये की बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।
दूध और दुग्ध उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ना तय माना जा रहा है। खासकर मध्यम वर्ग और रोजाना दूध, दही, घी और पनीर इस्तेमाल करने वाले परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। हालांकि, COMFED का कहना है कि बढ़ी हुई लागत और किसानों को बेहतर भुगतान देने के लिए यह फैसला जरूरी था।








