पटना- तेजस्वी यादव ने शराबबंदी को लेकर नीतीश सरकार पर जोरदार हमला बोला है. उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून को लागू किए 10 वर्ष पूरे हो गए लेकिन शासन-प्रशासन और शराब माफिया के नापाक मजबूत गठजोड़ की बदौलत यह कानून अपने उद्देश्य की पूर्ति में एकदम विफल रहा.
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि शराबबंदी नीतीश कुमार का सबसे बड़ा सांस्थानिक भ्रष्टाचार साबित हुआ. इसके कारण बिहार में 40 हजार करोड़ की अवैध समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है.
शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन की देखरेख वाले गृह और मद्य निषेध विभाग भी अधिकांश इनके पास ही रहे है. उन्होंने आगे कहा कि शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार में 𝟏𝟏 लाख केस दर्ज कर 𝟏𝟔 लाख से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है. अब तक 𝟓 करोड़ लीटर से अधिक शराब बरामद की गई है.
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तेजस्वी ने कहा कि पिछले 5 सालों में 𝟐 करोड़ लीटर से अधिक शराब जब्त की गई है, बिहार पुलिस के अपने आंकड़ों के अनुसार 𝟐𝟎𝟐𝟔 में औसतन 𝟑 लाख 𝟕𝟎 हजार 𝟔𝟖𝟒 लीटर प्रति महीने अवैध शराब बरामद की गई है.
तेजस्वी यादव ने कहा, अवैध शराब के अलावा इस कानून की विफलता के कारण बिहार में सूखा और अन्य प्रकार के नशे की सामग्री का कारोबार 𝟒𝟎 फीसदी बढ़ा है. युवा गांजा, ब्राउन शुगर व नशीली दवाओं का सेवन कर रहे हैं.
अब आप कल्पना करिए कि वास्तविकता में बिहार में शराब की उपलब्धता कितनी सहज और सरल है? सरकार यह क्यों नहीं बताती कि बिहार की सीमा में करोड़ो लीटर शराब कब, कैसे, क्यों और किसके सहयोग से आ रही है? कोई पैराशूट से तो गिराकर जाता है नहीं? सरकार जब्त की बजाय खपत के भी आंकड़े सार्वजनिक करे.’
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तेजस्वी यादव ने कहा कि आज ये शराबबंदी के नाम पर सुधारक बनने का स्वांग कर रहे है लेकिन यथार्थ यह है कि इसके नाम पर इन्होंने संस्थागत भ्रष्टाचार को बढ़ावा देकर अफसरशाही को बेलगाम, भ्रष्ट, आरामपरस्त और तानाशाह बनाया है. उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून अब मजाक बन गया है. इस कानून की आड़ में केवल गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है.








