पटना- बिहार में विभिन्न जनमुद्दों को लेकर कई वामपंथी और जनसंगठनों के कार्यकर्ता सोमवार को गांधी मैदान में जुटे. CPI, BKMU, AITUC, AIYF, AIKS, बिहार महिला समाज, खेत मजदूर यूनियन समेत कई संगठनों के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने गांधी मैदान से लोकभवन मार्च निकाला.
गांधी मैदान में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन आगे बढ़ने के दौरान प्रशासन की ओर से लगाए गए बैरिकेडिंग को प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की.
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने 21 सूत्री मांगें रखीं. इनमें मुख्यमंत्री के इस्तीफे से लेकर गरीबों और भूमिहीनों को आवास के लिए जमीन देने, रोजगार, किसानों और मजदूरों से जुड़े मुद्दे, शिक्षा व्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दे शामिल रहे.
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प्रदर्शनकारियों ने रोजगार गारंटी योजना को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि रोजगार गारंटी योजना को जिस नाम पर समाप्त किया गया है, उसे फिर से बहाल किया जाए और मनरेगा को उसके पुराने स्वरूप में लागू किया जाए. उनका कहना था कि मजदूरों के लिए रोजगार और न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित की जानी चाहिए.
किसानों को खाद उपलब्ध कराने, खाद की कथित कालाबाजारी पर रोक लगाने और फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की गई.
अखिल भारतीय किसान सभा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने किसानों की जमीन से जुड़े सवाल भी उठाए. प्रदर्शन के दौरान “किसानों के नाम पर किसानों की जमीन हड़पना बंद करो” जैसे नारे लिखे बैनर दिखाई दिए.
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प्रदर्शन में छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख रहे. प्रदर्शनकारियों ने परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने और परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग की. विश्वविद्यालयों में कथित अनियमितताओं को दूर करने की भी मांग उठाई गई.
AIYF यानी ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन के कार्यकर्ताओं ने रोजगार के सवाल को प्रमुखता से उठाया. प्रदर्शनकारियों ने बेरोजगारी कम करने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की.
प्रदर्शनकारियों ने 33 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े सवाल को भी अपनी मांगों में शामिल किया. इसके अलावा विरोध कर रहे लोगों ने बढ़ती महंगाई और कथित अत्याचार के मुद्दे पर भी सरकार से कार्रवाई की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई.
मार्च में SIR को लेकर भी विरोध देखने को मिला. कुछ संगठनों के कार्यकर्ता चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर बैनर लेकर पहुंचे. बिहार महिला समाज के बैनर पर महिला आरक्षण कानून और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग से जुड़े संदेश लिखे गए थे.
मार्च में महिलाओं, युवाओं, पुरुषों और बुजुर्गों की बड़ी संख्या दिखाई दी. अलग-अलग संगठनों के कार्यकर्ता अपने-अपने झंडे और बैनर लेकर गांधी मैदान से लोकभवन की ओर बढ़े. इस दौरान “बदलाव जरूरी है” और “इंकलाब जिंदाबाद” जैसे नारे भी लगाए गए.
मार्च में शामिल संगठनों ने कानून-व्यवस्था, अपराध, बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं, मजदूरों के रोजगार, छात्रों की परीक्षा व्यवस्था और गरीबों के विस्थापन जैसे मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए.
विभिन्न छोटे-बड़े जनसंगठनों की सामूहिक भागीदारी के कारण गांधी मैदान से लोकभवन की ओर निकला यह मार्च व्यापक विरोध प्रदर्शन के रूप में दिखाई दिया.
गांधी मैदान में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, जबकि आगे लोकभवन की ओर बढ़ने के दौरान बैरिकेडिंग तोड़े जाने के बाद पुलिस को प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए मशक्कत करनी पड़ी.








