डेस्क- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में 2 करोड़ रुपए जमा करने के लिए आखिरी बार 2 हफ्ते का समय दिया है। यह रकम सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करनी होगी।
कोर्ट ने अभिनेता को अपना पासपोर्ट सरेंडर करने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने उनके पुराने रवैये को देखते हुए भरोसा जताने में भी संदेह जाहिर किया।
CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘उनके पुराने रवैये को देखते हुए। कोई उन पर भरोसा कैसे कर सकता है? वे बॉलीवुड में ड्रामा और एक्टिंग करने में माहिर हैं। कोर्ट में भी वही कर रहे हैं।’
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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने राजपाल यादव को अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी से मिली राहत जारी रखी है। अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।
बता दें राजपाल यादव से जुड़े चेक बाउंस मामले में पिछले 3 सालों में दिल्ली हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक 15 बार सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने कभी भुगतान करने और कभी समझौते की बात कही। लेकिन हर बार राजपाल ने बात नहीं मानी। इससे पहले ट्रॉयल कोर्ट में भी मामला 6 साल चला।
यह विवाद 2010 का है। राजपाल ने अपनी पहली फिल्म डायरेक्ट करने के लिए दिल्ली की एक कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स से करीब 5 करोड़ रुपए का लोन लिया था। इस फिल्म का नाम ‘अता पता लापता’ था। कॉमेडी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी।
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इसके बाद राजपाल यादव को लोन चुकाने में दिक्कत हुई। ब्याज और दूसरे चार्ज जुड़ने से बकाया रकम कई साल में बढ़ती गई। यह रकम बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपए हो गई।
विवाद बढ़ने के बाद मुरली प्रोजेक्ट्स ने 2012 में फिल्म को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल 2018 में सातों मामलों में यादव और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था। शुरुआत में यादव को हर मामले में छह महीने की जेल और 1.60 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।
बाद में सजा कम की गई। 22 मई 2019 को उन्हें सातों मामलों में तीन महीने की साधारण कैद और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश दिया गया।
सेशंस कोर्ट ने 2024 में दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए तीन महीने की सजा और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपए का जुर्माना कायम रखा। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2026 के फैसले में सजा में दखल देने से इनकार कर दिया।








