पटना- सौभाग्य और समृद्धि का त्योहार हरतालिका तीज आज मनाया जा रहा है। आज सुहागिनें पति की लंबी आयु, सुखी दाम्पत्य जीवन और सुख-समृद्धि की कामना से निराहार और निर्जला व्रत रखेंगी।
हरितालिका तीज की पूजा में तृतीया-चतुर्थी तिथि होना चाहिए। आज तीज के दिन तृतीया और चतुर्थी तिथि के युग्म संयोग होने से अतिशुभकारी गौरी-गणेश योग और मातृ-पुत्र योग बन रहा है।
तीज व्रत में महिलाएं मिट्टी से भगवान शिव एवं माता पार्वती की प्रतिमा बनाकर उसे वेदोक्त मंत्रो से विधिवत पूजा-अर्चना कर पौराणिक कथाओं को सुनेगीं।
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पंडितों के अनुसार हरितालिका तीज व्रत की परंपरा त्रेता युग से चली आ रही है। माता पार्वती ने पहली बार शिव शंकर की बालुकामयी प्रतिमा बनाकर पूजा की थी।
लिंग पुराण के हवाले से बताया जाता है कि माता पार्वती वन में जाकर भोलेनाथ को अपने पति के रूप में पाने के लिए अन्न तथा जल ग्रहण किए बिना सालों तक तप करती रही।
तब शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किए थे। इसी विश्वास के साथ महिलाएं इस व्रत को तपस्या और निष्ठा के साथ करती हैं ताकि वो सात जन्मों तक शिव स्वरूप में उनके वही पति को प्राप्त करें।
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