The News Wall
साहस सच दिखाने की।

Patna: मंत्री बने रहने का कोई औचित्य नहीं- मंत्री रामसूरत राय

- sponsored -

- sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

पटना- बिहार में भाजपा कोटे के मंत्री रामसूरत राय के बड़े स्तर पर अंचलाधिकारी सहित कई अधिकारियों के स्थानांतरण पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा रोक लगाए जाने के बाद अब सियासत गर्म हो गई है. एक बार फिर जेडीयू और बीजेपी के रिश्ते को लेकर सवाल उठाए जाने लगे हैं. मंत्री ने 149 सीओ का ट्रांसफर रद्द किया जाने के मसले पर प्रतिक्रिया दी। रामसूरत राय ने कहा कि उनके विभाग में भू-माफियाओं की चलती है। भू-माफिया वे जो चाहते हैं, वही करवाते हैं। अगर उनकी बात मान लेते, तो ट्रांसफर की अधिसूचना रद्द नहीं होती।

मंत्री ने कहा कि ये माफिया और भ्रष्टाचारी मुझे बदनाम करना चाहते हैं और नहीं चाहते कि मैं मंत्री बना रहूं। ऐसी स्थिति में अगर मंत्री स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकता तो मंत्री बने रहने से क्या फायदा है। मेरे मंत्री बने रहने का औचित्य नहीं है।

रामसूरत राय ने कहा कि विधायकों की अनुशंसा का सम्मान रखते हुए 80 सीओ का ट्रांसफर किया। अगर यह गलत है, तो मैं गलत हूं। हालांकि मंत्री ने माना कि कुछ ट्रांसफर भूलवश ऐसे भी हुए हैं, जो दो साल से कम हैं। इसे सुधार लिया जायेगा। कई लोगों की गिद्ध नजर जमीन पर रहती है। ऐसे माफिया लोग नहीं चाहते कि विभाग में कोई सुधार हो।

विज्ञापन

विज्ञापन

इधर, इस मसले को लेकर राजद ने एनडीए सरकार की खिंचाई की. पार्टी ने कहा कि बिहार में ट्रांसफर-पोस्टिंग उद्योग फल-फूल रहा है. राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, हर साल जून और दिसंबर के महीनों के दौरान बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है और यह शुक्रवार को साबित हुआ जब नीतीश कुमार ने 149 अधिकारियों की तबादला-पोस्टिंग रद्द कर दी. नीतीश कुमार सरकार में यह एक खुला रहस्य है कि स्थानांतरण के लिए रिश्वत ली जाती है.

बता दें कि दरअसल, पिछले 30 जून को राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामसूरत राय ने बड़ी संख्या में अधिकारियों का ट्रांसफर किया था जिसमें 80 सीओ शामिल थे। कुछ ऐसे तबादले भी हो गए थे जिनका दो साल भी पूरा नहीं हुआ था। ट्रांसफर आदेश के दो दिन बाद मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से रोक लगा दी गई।

सीएम ऑफिस के इस आदेश से मंत्री रामसूरत राय की जमकर किरकिरी हुई जिससे मंत्री रामसूरत राय खफा हुए। रामसूसत राय ने कहा कि वे इस निर्णय से आहत हैं। लेकिन मुख्यमंत्री सरकार के मुखिया होते हैं। इसलिए उनके निर्णय को मानना उनका धर्म है। इसबीच मंत्री ने यह भी कहा कि अब जनता दरबार नहीं लगाएंगे। जनता को जहां और जिनके पास जाना है वहां जाएं।

 

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

ADVERTISMENT

ADVERTISMENT

- Sponsored

- Sponsored

Comments are closed.