देवघर- सरस्वती पूजा आज धूम-धाम से मनाई जा रही है. इस मौके पर देवघर के बाबा धाम मंदिर में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हैं. बाबा धाम में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की पूजा अर्चना कर जलाभिषेक किया. खास बात यह है कि भगवान शिव का आज तिलक महोत्सव भी आयोजित किया जायेगा।
मान्यता के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह महाशिवरात्रि के दिन संपन्न हुआ था. सनातन परंपरा में विवाह से पहले दूल्हे का तिलक किया जाता है. इसी परंपरा का निर्वहन देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम में बसंत पंचमी के दिन किया जाता है. यहां भगवान भोलेनाथ को दूल्हा मानकर उनका विधिवत तिलक किया जाता है.
तीर्थपुरोहितों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन बाबा बैद्यनाथ की विशेष पूजा-अर्चना होती है और तिलक की रस्म पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न कराई जाती है. इस परंपरा में मिथिलांचल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.
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मिथिलावासी स्वयं को भगवान भोलेनाथ का साला मानते हैं, क्योंकि माता पार्वती को हिमालय की पुत्री माना गया है और मिथिलांचल हिमालय की तराई से जुड़ा क्षेत्र है. यही वजह है कि बसंत पंचमी के दिन मिथिला क्षेत्र से लाखों श्रद्धालु “तिलकहरुवा” बनकर देवघर पहुंचते हैं.
यह परंपरा सदियों पुरानी है, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया जा रहा है. मिथिला से आए श्रद्धालु संतोष बताते हैं कि वे लोग देसी घी और मालपुआ बनाकर बाबा को अर्पित करते हैं, जिसे तिलक का प्रतीक माना जाता है.
इधर, मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है. वीआईपी और वीवीआईपी दर्शन पर फिलहाल रोक है सिर्फ शीघ्र दर्शनम कूपन के माध्यम से लोगों को दर्शन कराए जा रहे हैं लेकिन उसके लिए भी श्रद्धालुओं को कई घंटे तक इंतजार करना पर रहा है. भगवान शिव के दर्शन के लिए भक्त पांच किलोमीटर तक लंबी लाइन में लगे हुए हैं.
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