यूपी- प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर ‘शंकराचार्य’ की उपाधि का इस्तेमाल करने को लेकर सवाल उठाया है. देर रात जब अधिकारी नोटिस लेकर पहुंचे तो समर्थकों ने यह कहते हुए उन्हें वापस लौटा दिया कि, नोटिस रिसीव करने के लिए कोई पदाधिकारी नहीं है. इसके बाद नोटिस को शिविर के बाहर चिपका दिया गया.
दरअसल, यह पूरा मामला मौनी अमावस्या को शुरू हुआ। जब मौनी अमावस्या पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शोभायात्रा रोके जाने के बाद विरोध हुआ और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे.
मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने स्पष्ट कर बताया कि, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करने से नहीं रोका गया था. आपत्ति सिर्फ पहिया लगी पालकी पर थी, जिस पर सवार होकर संगम नोज तक जाना चाहते थे.
- Advertisement -
विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)
उस समय संगम नोज पर स्नानार्थियों की भारी भीड़ जमा थी ऐसे में पहिया लगी पालकी पर सवार होकर वह घाट तक जाते तो भगदड़ या कोई अनहोनी की घटना हो सकती थी. इसलिए इसको लेकर आग्रह किया गया. इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया.
बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट के 2022 के आदेश के अनुपालन के तहत ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के पद पर पट्टाभिषेक पर रोक है. इस समय ज्योतिष पीठ पर कोई धर्माचार्य शंकराचार्य के रूप में पट्टाभीषेकित नहीं है. ऐसे में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के बोर्ड पर नाम के आगे शंकराचार्य पद का प्रयोग किया गया है.
- Advertisement -
विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)








