डेस्क- सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं में से एक एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर इस समस्या से निपटने के लिए हाल ही में उठाए गए कदमों का विरोध किया। उनके वकील ने कहा कि सभी कुत्ते आक्रामक नहीं होते। दिल्ली एम्स में गोल्डी नाम का एक कुत्ता है, जो सालों से वहां है लेकिन कभी किसी को नहीं काटा।
इस बात पर कोर्ट ने टैगोर के वकील को फटकार लगाते हुए कहा, ‘क्या उस कुत्ते को हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर भी ले जाया गया है? सड़कों पर रहने वाले कुत्तों में अक्सर कीड़े-मकोड़े होते हैं और हॉस्पिटल में ऐसे संक्रमित कुत्तों की मौजूदगी से भयावह स्थिति हो सकती है।’
क्या आपको इसकी समझ है? हम आपको इस बहस की वास्तविकता से अवगत कराएंगे। आप सच्चाई से बिल्कुल परे हैं और हॉस्पिटल में ऐसे कुत्तों को अच्छा दिखाने या महान साबित करने की कोशिश न करें।
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टैगोर के वकील ने आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए हाल ही में उठाए गए कदमों का विरोध किया और एग्रेसिव और नॉर्मल कुत्तों का पता लगाने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने जैसे तर्क दिए।
वकील ने कोर्ट में यह भी सुझाव दिया कि काटने वाले कुत्तों की पहचान के लिए कॉलर को रंग के आधार पर कोडित किया जाए, जैसे जॉर्जिया और अर्मेनिया जैसे देशों में होता है। इस पर कोर्ट ने उनसे पूछा, ‘इन देशों की आबादी कितनी है। वकील आप थोड़ा वास्तविक बातें करें।’
आवारा कुत्तों पर शुक्रवार को करीब 1.50 घंटे सुनवाई चली। कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 13 जनवरी रखी।
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