रांची- पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने महागठबंधन की सरकार द्वारा बनाए गए ‘पेसा नियमावली’ को 1996 में संसद से पारित पेसा कानून की मूल भावनाओं के खिलाफ बताया है. उन्होंने इस पेसा कानून को ‘कोल्ड ब्लडेड मर्डर’ करार दिया है.
बीजेपी कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन के दौरान अर्जुन मुंडा ने ‘पेसा नियमावली’ को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसकी नियमावली को एक्ट के अनुरूप में बनाने की मांग की है.
उन्होंने बताया कि पेसा कानून लागू करने की मांग उठी तो लोग अदालत गए और सरकार को बाध्य किया गया. अर्जुन मुंडा ने कहा कि केंद्र सरकार के कई पत्र आने के बाद भी राज्य सरकार इसमें विफल रही तो अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा. जिसके बाद अब राज्य सरकार ने पेसा नियम बना लिया है.
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इसकी अधिसूचना जारी करने में सरकार को काफी देर लगी, लेकिन अब ऐसा लगता है कि सरकार ने क्यों नियमावली की अधिसूचना जारी करने में देरी लगाई. अब ये सतह पर आ रहा है कि राज्य सरकार ने ‘पेसा कानून 1996’ की ‘मूल भावना पर कुठाराघात’ किया है.
अर्जुन मुंडा ने आरोप लगाते हुए बताया कि राज्य सरकार ने नियमावली के साथ धोखाधड़ी की है. उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन अपने तरीके और संस्थाएं अपने तरीके से काम करेगी तो सिस्टम धराशायी होगा. अर्जुन मुंडा ने कहा कि वर्तमान स्वरूप में पेसा नियमावली झारखंड में संकट और पीड़ा देगी.
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