चाईबासा- झारखंड के सारंडा जंगल में नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट की चपेट में आई घायल हथिनी की मौत हो गई है. पिछले सोमवार को आईईडी विस्फोट में हथिनी के पैर में गंभीर चोटें आई थीं और उसकी उंगलियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थीं.
वन विभाग और गुजरात से आई वनतारा टीम ने मिलकर हथिनी का उपचार किया. उसे ट्रैंकुलाइज कर एंटीबायोटिक और पेनकिलर दवाएं दी गईं. ये टीम कई दिनों तक लगातार उसकी देखभाल करती रही लेकिन गहरी चोट और संक्रमण के कारण आखिरकार हथिनी की जान नहीं बचाई जा सकी. वन विभाग ने मौके पर ही हथिनी का पोस्टमार्टम कराया, जिसके बाद शव को जंगल में दफनाया गया.
अधिकारियों ने बताया कि हथिनी की मौत ने यह साफ कर दिया है कि सारंडा क्षेत्र में आईईडी विस्फोटक केवल मानव सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं. इस घटना के बाद वन विभाग और सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र में सघन तलाशी और निगरानी अभियान शुरू कर दी है.
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बता दें सारंडा जंगल, जो लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का गढ़ माना जाता है, पिछले कुछ महीनों में लगातार आईईडी विस्फोटों से दहल चुका है. इन विस्फोटों में जहां कई सुरक्षा बल के जवान शहीद या घायल हुए हैं, वहीं अब वन्यजीव भी इसकी चपेट में आ रहे हैं.








