रांची- कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग को लेकर शनिवार से आदिवासी कुड़मी समाज की ओर से रेल रोको आंदोलन शुरू किया गया है. तो दूसरी ओर आदिवासी संगठन भी सड़क पर हैं. ऐसे में इस संवेदनशील मामले पर दो मुख्य सत्ताधारी दल झामुमो और कांग्रेस के नेता भाजपा-आजसू पर निशाना साध रहे हैं.
झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि आज जो भी कुछ आंदोलन के नाम पर दिख रहा है, वह पूरी तरह दो समुदाय को लड़ाने की एक साजिश है.
झामुमो नेता ने कहा कि यह जो नए ‘अंग्रेज’ सत्ता पर काबिज हैं और डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी अपना रहे हैं, वह राज्य को दूसरा मणिपुर बनाना चाह रहे हैं. मनोज पांडेय ने कहा कि भाजपा के शासनकाल में राज्य के ओबीसी समाज का हक छीना गया.
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मनोज पांडेय ने कहा कि वह कुड़मी नेताओं से यह अनुरोध करते हैं कि राज्य के कुड़मियों का जो आरक्षण भाजपा की सरकार ने कम किया था, उसे वापस लेने की लड़ाई वह लड़ें तो सरकार आपके साथ है, लेकिन एक ऐसी मांग जो बहुत वर्षों से चली आ रही है इसमें कहीं न कहीं झारखंडी एकता को तोड़ने का प्रयास है.
मनोज पांडेय ने कहा कि कुड़मियों को एसटी में शामिल करने की जो मांग है वह पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन है. ‘मैं तमाम कुड़मी नेताओं से अनुरोध करूंगा कि आपसी एकता बनाए रखें और जो झारखंड विरोधी हैं, उनके झांसे में न आएं.’ झामुमो नेता ने कहा कि भाजपा और आजसू के लोकसभा में कई सांसद हैं, वहां पर इसकी आवाज उठानी चाहिए.
वहीं कुड़मियों के आंदोलन पर कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि हक और अधिकार के लिए आंदोलन करने का सबको अधिकार है. यह दायित्व संविधान ने दिया है.
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राकेश सिन्हा ने कहा कि हमें लगता है कि कुड़मियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने का मामला केंद्र सरकार का मामला है, स्वाभाविक रूप से भारतीय जनता पार्टी को इस पर फोकस करना चाहिए.
राकेश सिन्हा ने कहा कि जब आंदोलन होते हैं तो लोगों को परेशानियां होती ही हैं, लेकिन अब इस पर निर्णय केंद्र सरकार को लेना है. इस मुद्दे पर कांग्रेस का क्या स्टैंड है इस सवाल के जवाब में राकेश सिन्हा ने कहा कि इस पर केंद्र फैसला करें.








