डेस्क- दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के केस-मुकदमे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों में पुलिस महिला के पति या ससुरालवालों को तत्काल गिरफ्तार न करे. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों को लेकर कई अहम दिशा निर्देश भी दिये हैं.
देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की बेंच ने घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना के मामलों को लेकर ये फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि इन मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो साल पहले ही अपना फैसला सुनाया था. हाईकोर्ट का वह फैसला सही है औऱ उसे पूरे देश में अपनाया जाना चाहिये.
कोर्ट ने कहा कि जब कोई महिला अपने ससुराल वालों के खिलाफ 498A के तहत घरेलू हिंसा या दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कराए तो पुलिस वाले उसके पति या उसके रिश्तेदारों को दो महीने तक गिरफ्तार न करे. कोर्ट ने दो महीने की अवधि को शांति अवधि कहा है.
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कोर्ट के आदेश के मुताबिक प्राथमिकी या शिकायत दर्ज होने के बाद, “शांति अवधि” (जो कि प्राथमिकी या शिकायत दर्ज होने के दो महीने बाद तक है) समाप्त हुए बिना, नामजद अभियुक्तों की कोई गिरफ्तारी या पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी.
इस “शांति अवधि” के दौरान, पुलिस के समक्ष दर्ज मामला तुरंत उस जिले में FWC को भेजा जाएगा. कोर्ट ने कहा है कि केवल वही मामले FWC को भेजे जाएँगे, जिनमें IPC की धारा 498-A के साथ-साथ, कोई क्षति न पहुँचाने वाली धारा 307 और IPC की अन्य धाराएँ शामिल हैं और जिनमें कारावास 10 वर्ष से कम है.
सुप्रीम कोर्ट एक महिला IPS अधिकारी से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा था. महिला आईपीएस अधिकारी ने अपने पति औऱ ससुराल वालों के खिलाफ केस दर्ज कराया था.
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कोर्ट ने उन आरोपों को गलत मानते हुए उस महिला अधिकारी को उससे अलग हुए पति और उसके रिश्तेदारों के उत्पीड़न के लिए अखबारों में माफीनामा प्रकाशित कर माफी मांगने का भी आदेश दिया है.
देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मंगलवार को इन दिशानिर्देशों को पूरे भारत में लागू करने का निर्देश दिया.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 13 जून 2022 को क्रिमिनल रिवीजन नंबर 1126/2022 के विवादित फैसले में अनुच्छेद 32 से 38 के तहत ‘आईपीसी की धारा 498ए के दुरुपयोग से बचाव के लिए परिवार कल्याण समितियों के गठन’ के संबंध में तैयार किए गए दिशानिर्देश प्रभावी रहेंगे और अधिकारियों द्वारा लागू किए जाएंगे.”








