रांची- सावन की दूसरी संवरी पर आज रांची के पहाड़ी मंदिर में भोलेबाबा की पूजा के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा. इस दौरान मंदिर के शिखर पर विराजमान बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक किया गया. साथ ही महाकाल मंदिर में भगवान शिव के त्रिशूल और डमरू की विशेष पूजा-अर्चना भी की गई.
रांची जिला प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से सावन के पावन अवसर पर सुरक्षा और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया. मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ को सुव्यवस्थित रखने के लिए दो अलग-अलग मार्ग बनाए गए.
एक चढ़ाई के लिए और दूसरा उतरने के लिए. अरघा सिस्टम के जरिए शिवलिंग पर जल चढ़ाने की व्यवस्था ने भीड़ को काफी हद तक नियंत्रित रखा.
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ऐसी मान्यता है कि त्रिशूल और डमरू की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. स्थानीय पुजारियों के अनुसार, प्रत्येक वर्ष सावन के खास अवसर पर यहां विशेष पूजन होता है.
भक्त दूर-दूर से आकर त्रिशूल और डमरू का स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. यह पूजा विशेष रूप से उन भक्तों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है जो अपने जीवन में साहस, शांति और आध्यात्मिक बल की कामना करते हैं.
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