रांची- सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए समय पर फीस नहीं भरने के कारण एडमिशन से वंचित छात्र का दाखिला लेने का निर्देश आईआईटी आईएसएम धनबाद को दिया है. पैसे की तंगी की वजह से छात्र अपनी फीस जमा नहीं कर पाया था.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि छात्र समयसीमा के भीतर फीस जमा करने में विफल रहा, लेकिन उसे हर हाल में आईआईटी धनबाद में दाखिला मिलना चाहिए. पिछड़े समूह से आने वाले किसी भी प्रतिभावान छात्र को दाखिले से वंचित नहीं किया जाना चाहिए.
इस मामले में छात्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट प्रज्ञा सिंह बघेल ने बहस की. इस केस के लिए प्रज्ञा सिंह बघेल ने एक रुपए भी फीस नहीं ली. इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच में हुई.
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सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, “हम एक ऐसे यंग टैलेंट को नहीं गंवा सकते. वह झारखंड की कानूनी शरण में गया, फिर चेन्नई की कानूनी सेवाओं तक पहुंचा और आखिरी में हाईकोर्ट आया.
एक दलित लड़के को हर दरवाजे पर धक्के दे दिए गए.” चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “वह एक बेहतरीन स्टूडेंट है. सिर्फ 17,000 रुपये की कमी की वजह से उसे रोका गया.”
दरअसल उत्तर प्रदेश के एक छात्र ने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा पास कर ली थी. लेकिन समय पर फ़ीस नहीं भरने के कारण उसका दाखिला आईआईटी धनबाद में नहीं हो पाया.
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जिसके बाद यह मामला शीर्ष अदालत पहुंचा जहां सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी धनबाद को निर्देश दिया कि ऐसे मेधावी छात्र को दाखिले से वंचित नहीं किया जाना चाहिए.








