डेस्क- तिरुपति मंदिर के प्रसाद में फिश ऑयल मिलने की पुष्टि हुई है. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति मंदिर के प्रसाद में घी की जगह जानवरों की चर्बी मिलाने का आरोप लगाया था.
इसके बाद सैंपल जांच के लिए भेजे गए. अब जांच के बाद रिपोर्ट सामने आई है जिसमें फिश ऑयल मिलने की बात कही गई है.बुधवार को सीएम ने पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी पर आरोप लगाया था कि जगन राज में तिरुपति मंदिर के प्रसाद में घी की जगह जानवरों की चर्बी मिलाई गई.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात में केंद्र सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के पशुधन और खाद्य विश्लेषण और अध्ययन केंद्र की प्रयोगशाला की एक रिपोर्ट ने दी है.
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रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि की है कि वाईएसआरसीपी के सत्ता में रहने के दौरान प्रसिद्ध तिरुपति लड्डू बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए घी में पशु वसा की मौजूदगी थी. रिपोर्ट में पता चला है कि घी में मछली का तेल, गोमांस की चर्बी और चर्बी के अंश मौजूद थे. वहीं, चर्बी एक अर्ध-ठोस सफेद वसा उत्पाद है, जो सूअर के वसा ऊतकों से लिया जाता है.
इस बीच वाईएसआरसीपी के वरिष्ठ नेता बी. करुणाकर रेड्डी ने गुरुवार (19 सितंबर) को कहा कि सीएम नायडू ने केवल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए तिरुपति मंदिर के लड्डुओं को बनाने में घटिया सामग्री और पशु चर्बी के इस्तेमाल का आरोप लगाया है.
तिरुपति में विश्व प्रसिद्ध श्री वेंकटेश्वर मंदिर के दो बार अध्यक्ष रह चुके बी. करुणाकर रेड्डी ने आरोप लगाया कि नायडू ने विपक्षी पार्टी और राज्य के पूर्व सीएम वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी को निशाना बनाने के उद्देश्य से ऐसा कहा है.
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बी. करुणाकर रेड्डी ने कहा, ”वाईएसआरसीपी, वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी और पिछली सरकार पर हमला करने के लिए उन्होंने (नायडू) यह घिनौना आरोप लगाया कि स्वामी (देवता) के लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया गया था. यह निंदनीय है.
टीटीडी के पूर्व अध्यक्ष ने इन आरोपों को ‘अनुचित, भयावह और अपवित्र’ करार दिया. उन्होंने कहा, ”किसी भी तरह के आरोप लगाए जा सकते हैं, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए वेंकटेश्वर स्वामी के लड्डू पर इस तरह के आरोप लगाना निंदनीय हैं.








