रांची- झारखंड राज्य विधिज्ञ परिषद ने अधिवक्ता महेश तिवारी पर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए उन्हें बतौर अधिवक्ता विधि कार्य करने से दो वर्षों के लिए प्रतिबंधित कर दिया है. यह निर्णय हाल ही में आए न्यायालय के आदेश के आधार पर लिया गया है.
डोरंडा थाना कांड संख्या 191/2012 से जुड़े मामले में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी की अदालत ने 30 मार्च 2026 को महेश तिवारी को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं 341, 323, 354, 504 और 506 के तहत दोषी ठहराया गया था. अदालत ने उन्हें अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई, जिसमें धारा 354 के तहत दो वर्ष की सश्रम कारावास और जुर्माना भी शामिल है.
उन्होंने बताया कि इस निर्णय के बाद झारखंड राज्य विधिज्ञ परिषद ने मामले का संज्ञान लेते हुए अधिवक्ता आचरण और नियमों के तहत कार्रवाई की. परिषद को यह निर्णय झारखंड हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष रितु कुमार द्वारा उपलब्ध कराए गए न्यायालय के आदेश के आधार पर प्राप्त हुआ.
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परिषद की ओर से कहा गया है कि Advocates Act, 1961 की धारा 24-A के तहत नैतिक अधमता से जुड़े अपराध में दोषसिद्ध शख्स को अधिवक्ता के रूप में नामांकन नहीं दिया जा सकता.
बार काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी अतिरिक्त सुनवाई या नोटिस की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि कानून का प्रावधान स्वतः लागू होता है.
परिषद ने संबंधित सभी हितधारकों को महेश तिवारी की दोषसिद्धि की जानकारी देने का निर्णय लिया है. आदेश में कहा गया है कि महेश तिवारी का लाइसेंस सजा के आदेश की तारीख से दो सालों तक निलंबित रहेगा.
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