रांची- देश में स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत अब स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े हर छोटे-बड़े संस्थान और पेशेवरों को अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन करना होगा.
इस अभियान के दायरे में प्राइवेट अस्पताल, ब्लड बैंक, मेडिकल स्टोर, डायग्नोस्टिक सेंटर सहित सभी हेल्थ फैसिलिटी प्रोवाइडर्स को लाया गया है. इतना ही नहीं, डॉक्टरों और नर्सों का भी डिजिटल रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि उनकी पहचान और योग्यता की प्रमाणिकता सुनिश्चित की जा सके.
दरअसल, इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता लाना और फर्जी प्रैक्टिस पर रोक लगाना है. स्वास्थ्य विभाग के इस कदम के पीछे एक बड़ी चिंता झोलाछाप डॉक्टरों का बढ़ता नेटवर्क है. ग्रामीण और अर्द्धशहरी इलाकों में कई ऐसे फर्जी डॉक्टर सक्रिय हैं, जो मरीजों को गलत इलाज देकर उनकी जान से खिलवाड़ कर रहे हैं.
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नर्सिंग स्टाफ के मामले में यह व्यवस्था की गई है कि उनकी पढ़ाई पूरी होने के बाद संबंधित संस्थान से उन्हें विधिवत प्रमाणित किया जाएगा. वहीं डॉक्टरों की डिग्री और पंजीकरण की जांच संबंधित मेडिकल काउंसिल जैसे झारखंड मेडिकल काउंसिल के माध्यम से की जाएगी. इसके साथ ही डॉक्टर की यूनिवर्सिटी से प्राप्त डिग्री का भी सत्यापन किया जाएगा, ताकि किसी तरह के फर्जीवाड़े की गुंजाइश न रहे.








