पटना- चैती छठ की शुरुआत 22 मार्च से हो रही है। चैती छठ को लेकर बाजार सजकर तैयार हो गया है और लोग अंतिम चरण में जमकर खरीदारी कर रहे हैं. छठ में प्राकृतिक वस्तुओं का विशेष महत्व होता है. इस पर्व में मिट्टी के बर्तन और मिट्टी से बने वस्तुओं का महत्व बढ़ जाता है.
मिट्टी के चूल्हे पर प्रसाद बनता है और बांस के कलसूप और दउरा में अर्घ्य का सामान सजाया जाता है. मिट्टी के दीए जलाकर छठी मैया की पूजा की जाती है. इसलिए इन सब तमाम वस्तुओं को खरीदने के लिए लोग बाजार पहुंच रहे हैं.
इसके अलावा फल, सुप, दौरा, गुड़, चावल, गेहूं चना दाल, कद्दू आदि की भी खूब खरीददारी की जा रही है. वहीं, छठ को लेकर पटना के घाटों को तैयार किया जा रहा है। राजधानी के 49 घाटों पर इस बार श्रद्धालु अर्घ्य देंगे।
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पटना नगर निगम द्वारा पटना के घाटों पर तैयारियां की जा रही है, लेकिन कई घाटों पर श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दीघा घाट के पास घाट किनारे जमीन पर गिट्टी, ईंट, पत्थर बिखरे हुए हैं, जो श्रद्धालुओं के पैरों में चुभ सकते हैं।
कलेक्ट्रेट घाट पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 2 किलोमीटर पैदल चलना होगा। बांकीपुर क्लब के सामने से पैदल चल कर कलेक्ट्रेट घाट पर पहुंच सकते हैं।
दरभंगा हाउस काली घाट, पटना कॉलेज घाट, कदम घाट, कृष्णा घाट और उससे आगे रानी घाट से लेकर गायघाट तक पक्का घाट से ही व्रती अर्घ्य दे सकेंगे। गंगा का पानी किनारे तक पहुंचने से व्रतियों को पैदल नहीं चलना पड़ेगा।
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इधर, खतरनाक घाटों को पूरी तरह सील कर प्रवेश पर रोक है। साइनबोर्ड, बैनर और फ्लैक्स लगाए गए हैं, ताकि खतरनाक घाटों की पहचान हो सके।
चैती छठ में जिला प्रशासन ने 8 घाटों को खतरनाक घोषित किया है। इसमें एलसीटी घाट, राजापुर पुल घाट, पहलवान घाट, बांस घाट, शिव घाट, दीदारगंज घाट पूर्वी, रिकाबगंज घाट और बुंदेलटोली घाट शामिल हैं।








