पटना- व्यावसायिक एलपीजी गैस की आपूर्ति बाधित होने से कई शहरों में होटल, ढाबे और बड़े सामुदायिक रसोईघर संकट का सामना कर रहे हैं.
इसका असर अब धार्मिक और सामाजिक सेवाओं पर भी दिखने लगा है. पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर परिसर में वर्षों से चल रही गरीबों और असहायों के लिए भोजन की व्यवस्था भी इस संकट से प्रभावित हुई है.
महावीर मंदिर न्यास समिति के सचिव शायण कुणाल ने बताया कि उनके वेंडर ने व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में अचानक भारी कटौती कर दी है.
- Advertisement -
विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)
दरिद्र नारायण का भोजन बनना हो या प्रसाद बनाना हो, व्यावसायिक गैस सिलेंडर का इस्तेमाल होता है. लेकिन अभी वेबसाइट गैस सिलेंडर की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. इसके कारण मंदिर परिसर में संचालित दरिद्र नारायण भोज प्रभावित हुआ है
गैस की कमी के कारण यहां रोजाना दो वक्त मिलने वाला ‘दरिद्र नारायण भोज’ अब केवल एक वक्त ही कराया जा रहा है. इससे उन गरीबों और जरूरतमंदों की परेशानी बढ़ गई है जो प्रतिदिन मंदिर परिसर में भोजन के भरोसे आते थे.
शायण कुणाल ने बताया कि मंदिर में सबसे अधिक प्राथमिकता नैवेद्यम प्रसाद के निर्माण को दी जा रही है. महावीर मंदिर में बनने वाला नैवेद्यम प्रसाद श्रद्धालुओं के बीच काफी लोकप्रिय है.
- Advertisement -
विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)
प्रतिदिन बड़ी मात्रा में इसका निर्माण होता है. उन्होंने कहा कि फिलहाल जो एलपीजी सिलेंडर स्टॉक में उपलब्ध हैं उनका उपयोग प्रसाद तैयार करने में किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो.
शायण कुणाल ने बताया कि फिलहाल अयोध्या में राम मंदिर परिसर की राम रसोई में लकड़ी और कोयले के चूल्हों पर भोजन तैयार किया जा रहा है.
लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने में अधिक समय लगता है, इसलिए वहां तीन वक्त के भोजन की व्यवस्था फिलहाल दो वक्त तक सीमित हो गई है. हालांकि कोशिश की जा रही है कि जल्द ही गैस या वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था कर फिर से तीन वक्त भोजन शुरू कराया जा सके.
शायण कुणाल के अनुसार जिला प्रशासन ने भी भरोसा दिलाया है कि रामनवमी के दौरान प्रसाद निर्माण में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी और गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाएगी.
मंदिर प्रशासन को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में गैस संकट की स्थिति में सुधार होगा और दरिद्र नारायण भोज की पुरानी व्यवस्था फिर से शुरू हो सकेगी.








