डेस्क- पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल विवाद को लेकर सियासत तेज हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘राष्ट्रपति के साथ हुआ व्यवहार बेहद शर्मनाक है’.
ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. हर कोई जो डेमोक्रेसी और आदिवासी समुदायों के सशक्तीकरण में विश्वास करता है, वह निराश है. खुद आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति की ओर से व्यक्त की गई पीड़ा और दुख ने भारत की जनता के मन में अपार दुख पैदा कर दिया है.’
आगे पीएम मोदी ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं. राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन जिम्मेदार है.
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यह भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि पश्चिम बंगाल सरकार संथाल संस्कृति से जुड़े अहम मामले को इतनी लापरवाही से लेती है. राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है. इस पद की गरिमा का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए. उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल सरकार और टीएमसी में समझदारी आएगी.’
संथाल इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस को सिलीगुड़ी महकमा परिषद के फांसीदेवा क्षेत्र में आयोजित करवाया गया था. राष्ट्रपति का कहना है कि यह जगह बहुत छोटी थी और यहां संथाली लोग पहुंच ही नहीं पाए.
कार्यक्रम के बाद वह एक अन्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विधाननगर मैदान पहुंचीं. विधाननगर मैदान पहुंचकर राष्ट्रपति ने हैरानी जताते हुए कहा कि मुझे बताया गया था कि यह जगह छोटी है, इसलिए फांसीदेवा में कॉन्फ्रेंस रखी गई.
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उन्होंने कहा कि प्रशासन सोच रहा होगा कि ज्यादा संथाली लोग ना पहुंचें और राष्ट्रपति ऐसे ही आएं और घूमकर चली जाएं. लेकिन मैं बहुत दुखी हूं.
साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर नाराजगी जताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जब भी राष्ट्रपति आते हैं तो मुख्यमंत्री और मंत्री आते हैं. लेकिन मुख्यमंत्री मैडम नहीं पहुंचीं.
राज्यपाल का तो तबादला हो गया है. मुझे नहीं पता कि ऐसा क्यों किया गया. मैं भी बंगाल की ही बेटी हूं. ममता मेरी छोटी बहन हैं. किसी बात का गुस्सा होगा, इसलिए वहां कार्यक्रम किया. लेकिन कोई बात नहीं, कोई गिला शिकवा नहीं है.








