रांची- मैट्रिक के एक परीक्षार्थी को अवैध तरीके से हिरासत में लेने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने चतरा के डीएसपी के साथ-साथ टंडवा और लावालौंग थानेदार को तलब कर लिया है। सुनवाई के दौरान तीनों अधिकारियों का मोबाइल जब्त कर उन्हें कोर्ट रूम में ही बैठा दिया गया।
हाईकोर्ट ने चतरा के SP को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होकर यह बताने का निर्देश दिया है कि आखिर किस आधार पर उस परीक्षार्थी को हिरासत में लिया गया था। कोर्ट ने साफ तौर पर पूछा कि क्या इस मामले में कोई केस डायरी तैयार की गई है या नहीं।
यह कार्रवाई परीक्षार्थी की मां की ओर से दायर हैबियस कॉर्पस याचिका पर की गई है। मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की दोबारा विस्तार से सुनवाई की जाएगी।
- Advertisement -
विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)
सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस अधिकारियों से कई कड़े सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा कि 26 और 27 जनवरी की रात दो बच्चों को उनके घर से क्यों उठाया गया? पूछताछ के बाद उन्हें तुरंत क्यों नहीं छोड़ा गया? और सबसे अहम सवाल यह कि दोनों बच्चों को करीब 10 दिनों तक हिरासत में क्यों रखा गया?
चतरा DSP ने अदालत को बताया कि पूरे मामले का जिक्र स्टेशन डायरी में किया गया है। इसके बाद कोर्ट ने मोबाइल फोन के जरिए चतरा SP से बात की और केस डायरी को लेकर जानकारी मांगी। कोर्ट ने पूछा कि क्या केस डायरी में बच्चों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने का कोई स्पष्ट उल्लेख है या नहीं।
ठोस जानकारी नहीं मिलने पर कोर्ट ने चतरा DSP समेत टंडवा और लावालौंग थानेदार का मोबाइल फोन जब्त कर लिया और तीनों को कोर्ट रूम में ही बैठा दिया।
- Advertisement -
विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)
मिली जानकारी के अनुसार लावालौंग थाना की पुलिस ने 26 और 27 जनवरी की दरम्यानी रात को दो बच्चों को घर से उठाया था। इसके बाद दोनों को टंडवा थाना को सौंप दिया गया।
अदालत ने पुलिस से यह भी पूछा कि क्या टंडवा थाने में कांड संख्या 26/2026 दर्ज थी और अगर उसी केस में पूछताछ के लिए बच्चों को बुलाया गया था, तो क्या इसका कोई जिक्र केस डायरी में है?
इस पूरे मामले में हाईकोर्ट की सख्ती से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब अगली सुनवाई में कोर्ट यह तय करेगा कि पुलिस की ओर से नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं और आगे क्या कार्रवाई होगी।








