रांची- मनरेगा दिवस के मौके पर रांची के नामकुम में सैकड़ों मनरेगा मज़दूरों, कार्यकर्ताओं और ग्रामीण परिवारों ने मजदूर महापंचायत एवं रैली आयोजित की. यह आयोजन MGNREGA बचाओ मोर्चा एवं NREGA वॉच के संयुक्त बैनर तले हुआ, जिसमें झारखंड के किसान मजदूर संगठनों की भागीदारी रही.
इस दौरान सभी ने एक स्वर में VB-GRAMG को नकारा और MGNREGA को फिर से लागू करने की मांग की. मजदूरों ने नामकुम चौक से पुराना प्रखंड परिसर तक मार्च निकाला.
मजदूर महापंचायत में सिमडेगा, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, लोहरदगा, लातेहार, पलामू, गुमला, बोकारो, हजारीबाग और रांची से आए सैकड़ों मनरेगा मजदूर, कार्यकर्ता और ग्रामीण परिवार शामिल हुए.
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महापंचायत में VB-GRAMG के विरोध और मनरेगा बहाली का प्रस्ताव पारित किया गया और यह संकल्प लिया गया कि यह एक लंबी लड़ाई की नई शुरुआत है और मनरेगा कानून की पूर्ण बहाली तक संघर्ष जारी रहेगा.
राष्ट्रपति के नाम इस प्रस्ताव को भेजा गया है. कार्यक्रम के दौरान हस्ताक्षर अभियान चलाया गया, जिसे केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री को दिल्ली भेजा जाएगा.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आजादी के लगभग 50 साल बाद काम का अधिकार एक मौलिक अधिकार बना था. मौजूदा मजदूर विरोधी सत्ता ने ग्रामीण भारत की आजीविका पर गहरा हमला किया है.
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यह केवल रोजगार नहीं बल्कि संविधान पर सीधा हमला है. मनरेगा एक सार्वभौमिक और मांग आधारित कानून था, जो देश के हर ग्रामीण क्षेत्र में लागू होता था.
सवाल उठाते हुए कहा कि 20 साल में 100 दिन का काम भी नहीं मिला है. इसमें पारदर्शिता नहीं है. भ्रष्टाचार बढ़ रहा है. VB-GRAMG इससे क्या समाधान देगा? मनरेगा खत्म होने पर परिवारों को मजबूरी में पलायन करना पड़ेगा और शहरों में बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होगी.








