रांची- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दावोस यात्रा के बाद अब लंदन यात्रा और ऑक्सफोर्ड में व्याख्यान के लिए मिले आमंत्रण से झामुमो काफी उत्साहित है. पार्टी उन्हें ग्लोबल आदिवासी नेता के रूप में प्रचारित कर रही है.
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता मधु कोड़ा इससे सहमत नहीं हैं. उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने राज्य में आदिवासियों को सुरक्षा नहीं दे सकता, वह आदिवासियों का सबसे बड़ा नेता कैसे हो सकता है.
पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय परिषद सदस्य मधु कोड़ा ने कहा कि वे नहीं मानते कि हेमंत सोरेन देश के आदिवासियों के एकमात्र बड़े नेता हैं. उन्होंने तर्क दिया कि पिछले छह वर्षों से हेमंत सोरेन सत्ता में हैं, लेकिन राज्य में आदिवासी सुरक्षित नहीं हैं. सबसे अधिक हत्याएं आदिवासियों की हो रही हैं और उनकी जमीन भी हेमंत राज में सबसे ज्यादा लूटी जा रही है.
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मधु कोड़ा ने कहा, “जिस आदिवासी नेता के शासन में आदिवासी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो वह कैसे देश-विदेश का बड़ा नेता हो सकता है.” उन्होंने पेसा कानून की नियमावली बनाकर आदिवासियों से छल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे नेता को आदिवासियों का एकमात्र बड़ा, राष्ट्रीय और ग्लोबल नेता बताना हास्यास्पद है.
हेमंत सोरेन को एक स्थापित जनजातीय नेता बताते हुए झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि वे नहीं मानते कि मधु कोड़ा और चंपाई सोरेन जैसे नेता आदिवासी समुदाय के बड़े नेताओं में से एक हैं.
मनोज पांडेय ने कहा, “जनता किसी भी व्यक्ति को अपना नेता या अगुआ मानती और बनाती है.” उन्होंने आगे कहा कि जहां तक आदिवासियों के नेता की बात है, अब उनकी चर्चा राष्ट्रीय फलक पर नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय फलक पर हो रही है. ऑक्सफोर्ड से व्याख्यान का न्योता मिलना यह साबित करता है कि हेमंत सोरेन का राजनीतिक कद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है.
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