बिहार- 17 जनवरी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है. बिहार के पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर प्रखंड स्थित कैथवलिया जानकीपुर स्थित विराट रामायण मंदिर में दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित हो गया है.
स्थापना कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. इस मौके पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई और कई पवित्र नदियों के जल से भोलेनाथ का जलाभिषेक किया गया.
210 मीट्रिक टन वजन वाले शिवलिंग को उठाने के लिए दो बड़े-बड़े क्रेन मंगवाए गए थे. पूजा-पाठ का कार्यक्रम शनिवार सुबह से चलता रहा. सीएम नीतीश कुमार इस स्थापना कार्यक्रम में पहुंचे. उनके साथ ही उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी पहुंचे. गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना की गई.
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सुबह 8:30 बजे से पूजा शुरू हुई और दोपहर 1:00 बजे तक शिवलिंग की स्थापना का कार्यक्रम संपन्न हुआ. देवों के देव महादेव का भव्य अभिषेक किया गया.
शिवलिंग स्थापना और जलाभिषेक के लिए देश के कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, यमुनोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज, गंगासागर, सोनपुर और रामेश्वरम सहित कई नदियों के जल लाए गए थे.
पूजा के लिए कंबोडिया और कोलकाता से विशेष फूल मंगाए गए. अयोध्या राम मंदिर, काशी विश्वनाथ, गुजरात, हरिद्वार और महाराष्ट्र से पंडित शामिल इस स्थापना समारोह में शामिल हुए, जिन्होंने मंत्रोच्चार के साथ शिवलिंग की स्थापना करवायी.
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देश-विदेश से आए पंडितों और विद्वानों के मंत्रोच्चार के बीच सायन कुणाल, स्वर्गीय आचार्य कुणाल के बेटे और उनकी सांसद पत्नी शांभवी चौधरी यजमान की भूमिका में रहे. इस स्थापना के सारे विधि-विधान किए.
तमिलनाडु के महाबलीपुरम में ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित इस शिवलिंग की ऊंचाई 33 फीट, गोलाई 33 फीट है, जिसे निर्माण करने में करीब 3 करोड़ रुपये का खर्च आया है. यह दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है.
210 मीट्रिक टन के शिवलिंग को तमिलनाडु से बिहार तक लाने के लिए 96 पहिये वाला ट्रक का इस्तेमाल किया गया, जो कई राज्य और विभिन्न शहर से होते हुए पूर्वी चंपारण तक पहुंचा है. शिवलिंग की स्थापना के लिए राजस्थान और भोपाल से 750 टन की क्षमता वाले दो क्रेन मंगाए गए थे.








