रांची- पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने पेसा को लेकर राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णय को सार्वजनिक करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि पेसा की मूल भावना के अनुरूप यदि निर्णय लिए गए हैं तो इसका वे इसका स्वागत करते, मगर जिस तरह से इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है उससे तो सभी भ्रम की स्थिति में हैं.
अर्जुन मुंडा ने कहा कि राज्य में 32 साल बाद भाजपा शासनकाल में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हुए और स्थानीय स्तर पर जनजातीय समाज को मजबूत करने का काम किया गया था यदि पेसा के मूल स्वरूप के आधार पर राज्य द्वारा निर्णय लिए गए हैं तो उससे स्थानीय स्वशासन को मजबूती मिलेगी.
भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए अर्जुन मुंडा ने कहा कि हर कोई जानना चाहता है कि मंत्रिपरिषद ने इसको लेकर क्या विचार किया है. उन्होंने कहा कि पेसा एक्ट और पंचायती राज एक्ट भाजपा के शासनकाल में बना था.
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इसके बाद 32 साल बाद राज्य में चुनाव हुए थे. उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि मंत्रिपरिषद द्वारा अप्रूव किया गया कोई भी नियम PESA के प्रावधानों का सख्ती से पालन करेगा, और उसकी भावना के खिलाफ नहीं होगा, खासकर इसलिए क्योंकि 32 साल बाद चुनाव होने के बाद लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं.
कहा कि लोगों को न्याय संवैधानिक अधिकारों और सिस्टम के तहत मिलना चाहिए और न्याय देने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले साधन सही होने चाहिए. इस नजरिए से, कानून का शासन बहुत महत्वपूर्ण है.








