पटना- उपेंद्र कुशवाहा बिहार की राजनीति के चर्चित राजनेताओं में से एक हैं. कभी पार्टी टूट के कारण, तो कभी गठबंधन बदलने के कारण चर्चा में रहते हैं. हाल फिलहाल में बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाना उनके लिए गले का फांस दिख रहा है. पार्टी के विधायक उसे सुसाइडल स्टेप यानी आत्मघाती कदम बता रहे हैं.
मधुबनी से चुनाव जीतने वाले माधव आनंद तो खुलकर अपनी नाराजगी भी जता रहे हैं. माधव आनंद ने एक निजी चैनल से बातचीत में खुलकर कहा कि उपेंद्र कुशवाहा खुद राज्यसभा में हैं.
उनकी पत्नी विधायक बन गईं. बेटे को मंत्री बना दिये हैं जबकि किसी सदन के सदस्य भी नहीं हैं. बहू को भी राजनीति में लाने की बात हो रही है, तो ऐसे में पार्टी के कार्यकर्ता क्या करेंगे?
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उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा में मधुबनी से चुनाव जीतने वाले माधव आनंद, बाजपट्टी से चुनाव जीतने वाले रामेश्वर महतो और दिनारा से चुनाव जीतने वाले आलोक सिंह विशेष रूप से चर्चा में है.
दरअसल, जिस दिन उपेंद्र कुशवाहा ने पटना में सरकारी आवास पर लिट्टी मटन का भोज दिया था उस दिन तीनों उस भोज से गायब रहे. हालांकि उसी दिन बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ दिखाई दिए. तीनों की तरफ से सोशल मीडिया पर पोस्ट भी डाला गया.
दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने के बाद बाजपट्टी के विधायक रामेश्वर महतो ने तो खुलकर सोशल मीडिया के माध्यम से निशाना साधा था. रामेश्वर महतो ने फेसबुक पर लिखा था, राजनीति में सफलता केवल भाषणों से नहीं, बल्कि सच्ची नीयत और दृढ़ नीति से मिलती है.
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जब पार्टी नेतृत्व की नीयत धुंधली हो जाए और नीतियां जनहित से अधिक स्वार्थ की दिशा में मुड़ने लगें, तब जनता को ज्यादा दिनों तक भ्रमित नहीं रखा जा सकता. आज का नागरिक जागरूक है, वह हर कदम, हर निर्णय और हर इरादे को बारीकी से परखता है.
रोहतास में जब राष्ट्रीय लोक मोर्चा में टूट की अटकलों पर उपेंद्र कुशवाहा से सवाल किया गया तो, वह पत्रकारों पर ही भड़क गए. उन्होंने पत्रकारों को नसीहत देते हुए कहा कि आपके पास वाजिब सवाल ही नहीं है, जिसका जवाब दिया जाए. आपलोगों के ऐसे सवालों का मेरे पास कोई जवाब नहीं क्योंकि यह वाजिब सवाल ही नहीं है.








