यूपी- अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर 191 फीट की ऊंचाई पर भगवा धर्म ध्वजा फहराई गई. प्रधानमंत्री मोदी ने वैदिक मंत्रों और अनुष्ठान के बीच बटन दबाकर ध्वजा को शिखर तक पहुंचाया.
ध्वज पर सूर्य का चिह्न, सूर्य के मध्य में ‘ॐ’ और साथ में कोविदार वृक्ष अंकित है. पूरी ध्वजा में अयोध्या का इतिहास, सूर्यवंश की परंपरा और रामायण की गहराई छिपी है. इस ध्वजा को गुजरात के अहमदाबाद जिले के कश्यप मेवाड़ और उनकी 6 कारीगरों की टीम ने बनाया है.
प्रधानमंत्री मोदी सुबह करीब 10 बजे अयोध्या पहुंचे और रोड शो करते हुए सप्तमंदिर पहुंचे. फिर श्री राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की पूजा अर्चना करने के बाद अभिजीत मुहूर्त में ध्वजारोहण किया.
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प्रधानमंत्री मोदी साकेत महाविद्यालय से राम जन्मभूमि तक रोड शो करते हुए गए. रास्ते वे सप्तमंदिर में रुके, जहां पूर्जा अर्चन करके उन्होंने समारोह की शुरुआत की.
फिर हनुमानगढ़ी में पूजा करने के बाद वे राम मंदिर गए और रामलला के साथ राम दरबार में आरती करने के बाद ध्वजारोहण समारोह में पहुंचे. वे राम मंदिर बनाने वाले इंजीनियर्स और श्रमिकों से भी मिले. ध्वज बनाने वाले कश्यप मेवाड़ और उनकी टीम से भी मुलाकात की.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि जो लोग मंदिर में आने में असमर्थ हैं और फिर भी दूर से मंदिर के ध्वज को प्रणाम करते हैं, उन्हें भी वही पुण्य प्राप्त होता है. यह ध्वज दूर से ही रामलला की जन्मभूमि के दर्शन प्रदान करेगा और आने वाले युगों तक सभी मानव जाति को भगवान श्री राम के आदेशों और प्रेरणाओं को व्यक्त करेगा.
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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि धर्म ध्वज सिर्फ एक ध्वज नहीं है, यह भारतीय सभ्यता के कायाकल्प का ध्वज है, भगवा रंग, सूर्यवंश का चिन्ह, ‘ॐ’ शब्द और कोविदारा वृक्ष, रामराज्य की महिमा का प्रतीक हैं, यह ध्वज एक संकल्प है, एक सिद्धि है, सृजन के संघर्ष की गाथा है, सैकड़ों वर्षों के संघर्ष का साकार रूप है.
आने वाली हजारों शताब्दियों तक यह ध्वज भगवान राम के मूल्यों का उद्घोष करेगा. सत्य ही धर्म है. कोई भेदभाव या पीड़ा न हो, शांति और सुख हो, कोई गरीबी न हो, कोई असहाय न हो.








