डेस्क- भारत के अगले चीफ जस्टिस (CJI) बनने जा रहे जस्टिस सूर्यकांत ने भारतीय न्यायपालिका के भविष्य को लेकर बड़ा संदेश दिया है. मीडिया से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि अब समय आ गया है कि भारत ब्रिटिश मॉडल की अदालतों से आगे बढ़कर अपनी ‘स्वदेशी जूडिशियल सिस्टम’ डेवलप करे.
ऐसा सिस्टम जो भारतीय समाज, भारतीय लोगों और भारतीय संस्कृति के अनुरूप हो. जस्टिस सूर्यकांत सोमवार को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे.
जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि इंडियन जूडिशियरी को असली भारतीय रूप देने के लिए कई स्तरों पर सुधार की जरूरत है. सिर्फ प्रक्रियाओं में नहीं बल्कि सोच और ढांचे में भी बदलाव करना होगा.
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उन्होंने कहा, औपनिवेशिक न्यायालयों से आगे बढ़कर भारतीय मॉडल बनाने का वक्त आ गया है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारत की अदालतें आज भी काफी हद तक ब्रिटिश शासन के दौरान डिजाइन की गई प्रणाली पर चलती हैं, चाहे वह कोर्टरूम की प्रक्रिया हो, कोर्ट की भाषा हो या कई पुराने कानून.
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, नए भारत की न्याय प्रणाली तभी मजबूत होगी जब वह आम नागरिक विशेषकर ग्रामीण भारत के लिए आसान हो. उन्होंने कहा, औपनिवेशिक अदालतें जनता से दूर थीं, उनका डिजाइन सत्ता-केंद्रित था. आम आदमी अदालत में जाते ही घबरा जाता है.
कई प्रक्रियाएं इतनी तकनीकी हैं कि न्याय तक पहुंच मुश्किल हो जाती है. उन्होंने जोर दिया, एक असली भारतीय न्यायपालिका वह होगी जो सरल हो, डिजिटल हो, और ग्रामीण नागरिक भी बिना डर के उसे इस्तेमाल कर सके.
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जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी कहा कि न्यायपालिका में वास्तविक सुधार तभी होगा जब जजों की नियुक्ति प्रक्रिया स्ट्रीमलाइन हो. पारदर्शिता बढ़े. लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाए.
उन्होंने कहा , औपनिवेशिक युग की देरी, अस्पष्टता और जटिलता को खत्म करना होगा. लोगों को तेज और भरोसेमंद न्याय मिलना चाहिए. न्याय सिर्फ दिया न जाए, जनता उसे महसूस भी करे.








