पटना- बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी की करारी हार के बाद आज प्रशांत किशोर मीडिया के सामने आए. उन्होंने साफ कर दिया कि वह राजनीति से संन्यास नहीं लेंगे और अगले 5 वर्षों तक जनहित के मुद्दों को लेकर लोगों के बीच रहेंगे.
प्रशांत किशोर ने कहा, हमने ईमानदार प्रयास किया है और उसमें बिल्कुल सफलता नहीं मिली. इसे स्वीकार करने में कोई बुराई नहीं है. व्यवस्था परिवर्तन की बात छोड़िए, हम सत्ता परिवर्तन भी नहीं करा सके लेकिन बिहार की राजनीति बदलने में हमारी भूमिका जरूर बनी है.
वहीं, प्रशांत किशोर ने पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने अपनी हार और एनडीए की जीत की कई वजहें बताईं. पीके ने इस दौरान मधुबनी सीट का उदाहरण देते हुए गड़बड़ी की आशंका जाहिर करते हुए पूछा कि लोगों को जिस पार्टी का चुनाव चिह्न तक नहीं पता, उसे एक लाख से अधिक वोट कैसे मिल गए?
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प्रशांत किशोर ने मधुबनी विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां से उपेंद्र कुशवाहा जी की पार्टी के उम्मीदवार चुनाव जीतकर आए हैं. मैं दावा कर रहा हूं मधुबनी में कितने ऐसे वोटर हैं जिनको उपेंद्र कुशवाहा जी की पार्टी के सिंबल तक पता नहीं. जिनका कोई सिंबल भी नहीं जानता, नाम भी नहीं जानता. उसको एक लाख-सवा लाख वोट कैसे आया?
प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके पास कोई प्रमाण नहीं है कि वो वोट कैसे आए? लेकिन राजनीतिक-सामाजिक क्षेत्र में जुड़े होने के नाते ये आश्चर्य का विषय है कि जिस मधुबनी क्षेत्र में लोग ये नहीं जानते हैं कि कौन सा पार्टी लड़ रही है, कौन सा प्रत्याशी लड़ रहा है.
उस पार्टी का सिंबल क्या है, उसको सवा लाख वोट आया है और जो लोग वहां जीवनभर राजनीति कर रहे हैं, उनको वोट नहीं आया है. संभव है कि उनको उतना समर्थन है.
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बता दें जन सुराज पार्टी के 238 उम्मीदवार मैदान में थे. जिनमें से 236 की जमानत जब्त हो गई. पार्टी को महज 3.5 फीसदी वोट मिले. वहीं 35 सीटों पर जीतने और हारने वाले कैंडिडेट के मार्जिन के बराबर जन सुराज के प्रत्याशियों को मत हासिल हुए.








