रांची- बिहार विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा न लड़ेगा और न ही प्रचार करेगा इसकी विधिवत घोषणा पार्टी के वरिष्ठ नेता सह मंत्री सुदिव्य कुमार ने कर दी है. अब झामुमो और राजद के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है.
दरअसल, गिरिडीह में पत्रकारों से बात के दौरान मंत्री सुदिव्य ने गठबंधन के साथियों की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘ इंडिया गठबंधन के गठन में झारखंड मुक्ति मोर्चा की मजबूत साझेदारी रही है. अगर राजनीतिक परिस्थितियों झारखंड मुक्ति मोर्चा और झारखंडियों के हितों के विपरीत रहेगी तो पार्टी और भी कोई निर्णय ले सकती है’.
उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 2015 के चुनाव में अपने सहयोगी दल राष्ट्रीय जनता दल को मदद करने का प्रयास किया. 2019 के चुनाव में भी राजद महागठबंधन का पार्ट था.
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2019 के चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के एकमात्र विधायक सत्यानंद भोक्ता चुने गए थे. गठबंधन धर्म का पालन करते हुए हेमंत सोरेन ने सत्यानंद भोक्ता को 5 वर्षों तक मंत्री बना कर रखा.
2024 के विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने गठबंधन धर्म का पालन करते हुए कांग्रेस, राजद और वाम दलों को समाहित किया चुनाव के परिणाम के बाद सरकार बनाने की जब बारी आई तो चार सीट मिलने के बावजूद राजद के कोटे से एक मंत्री बनाया गया.
मंत्री ने कहा कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने झारखंड मुक्ति मोर्चा को तीन सीटों का आश्वासन दिया था. उस दौरान भी झारखंड मुक्ति मोर्चा को धोखा दिया गया और तीनों सीटें उसे वक्त की गठबंधन की पार्टियां कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यू ने बांट लिया.
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इस तरह से झामुमो को धोखा मिला था. इसके बावजूद जेएमएम गठबंधन धर्म का पालन करती रही. इसके बदले 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जिस तरह का धोखा झारखंड मुक्ति मोर्चा को मिला है वह आहत करने वाला है.
मंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में साफ कहा कि यह बात स्पष्ट है कि झारखंडी चेतन को दिया गया धोखा झारखंडी नहीं भूलते हैं. निश्चित तौर पर आगे उनको यह बताएंगे कि झारखंड मुक्ति मोर्चा एक बड़ी ताकत है.
इस देश के आदिवासियों की एक मजबूत आवाज है, इस देश के आदिवासियों की आवाज को दबाने की कोशिश की गई है तो निश्चित तौर पर इसका खामियाजा भुगतना ही पड़ेगा.








