डेस्क- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मामले पर सुनवाई करते हुए निर्वाचन आयोग (ईसी) को आदेश दिया कि वह 19 अगस्त तक उन 65 लाख लोगों के नाम सार्वजनिक करे, जिन्हें वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है.
इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा कि ईसी को यह भी बताना होगा कि उन वोटरों के नाम किन कारणों से हटाए गए. मामले की अगली सुनवाई अब 22 अगस्त को होगी.
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि बिहार लोकतंत्र की जन्मभूमि है और मतदाता सूची में पारदर्शिता आवश्यक है. कोर्ट ने यह भी पूछा कि मृत, विस्थापित या मल्टीपल रजिस्ट्रेशन वाले मतदाताओं की सूची सीधे वेबसाइट पर क्यों नहीं डाली जा रही, ताकि आम मतदाता को सुविधा हो और नकारात्मक धारणा खत्म हो सके.
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चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने बताया कि 1 अप्रैल 2025 तक बिहार में कुल मतदाता 7.89 करोड़ थे, जिनमें से 7.24 करोड़ ने फॉर्म भरे, जबकि 65 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए हैं, जिनमें 22 लाख मृत घोषित किए गए हैं. द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि ड्राफ्ट रोल में किसी का नाम बिना कारण नहीं हटाया गया है और जिन लोगों ने केवल फॉर्म भरे हैं, उन्हें अगस्त में दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे.
कोर्ट ने निर्देश दिया कि हटाए गए मतदाताओं की सूची जिला निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर, पंचायत कार्यालय और बीएलओ के पास भी प्रदर्शित की जाए, साथ ही इसे सोशल मीडिया पर भी साझा किया जाए, ताकि लोग अपने नाम शामिल करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ दावा प्रस्तुत कर सकें.
बता दें, राजद और कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के नेताओं तथा गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की कवायद को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है. एडीआर ने दलील दी कि इस कवायद को देशभर में करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
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