बेतिया- जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जन सुराज कोई पारंपरिक राजनीतिक पार्टी नहीं है. यह एक ऐसी व्यवस्था है, जहां नेताओं को भी अपनी योग्यता साबित करनी होगी.
उम्मीदवारों को परीक्षा देनी होगी और उसमें सफल होने पर ही उन्हें चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा. उन्होंने इसे यूपीएससी और बीपीएससी जैसी परीक्षा प्रणाली से जोड़ते हुए एक नई राजनीतिक सोच बताया है.
बेतिया सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि अब तक देश की राजनीति में कोई भी पार्टी ऐसी नहीं रही है जो नेताओं की परीक्षा लेती हो. लेकिन जन सुराज इस परंपरा को तोड़ रही है. पार्टी में टिकट उन्हीं लोगों को मिलेगा जो परीक्षा में सफल होंगे. यह परीक्षा उम्मीदवारों की समझ, नीति, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक सोच की जांच के लिए ली जाएगी.
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प्रशांत किशोर ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह लाखों युवा यूपीएससी और बीपीएससी की परीक्षा में भाग लेते हैं और सफल होने पर अधिकारी बनते हैं, ठीक उसी तरह जन सुराज भी उम्मीदवारों को परखेगी. उन्होंने कहा कि अब राजनीति भी एक गंभीर जिम्मेदारी है, जिसमें प्रवेश करने के लिए मापदंड तय किए जाने जरूरी हैं.
उन्होंने बताया कि जन सुराज यह आकलन कर रही है कि कौन-कौन से प्रत्याशी विधानसभा चुनाव के योग्य हैं और कौन वार्ड पार्षद या मुखिया पद के लिए उपयुक्त हैं. जो व्यक्ति जिस पद के लिए काबिल होगा, उसे उसी स्तर का टिकट दिया जाएगा. पार्टी एक व्यवस्थित तरीके से प्रत्येक उम्मीदवार की क्षमता का आंकलन कर रही है.
प्रशांत किशोर ने कहा कि जो लोग परीक्षा में पास नहीं होंगे, उन्हें सबसे निचले स्तर पर यानी वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ाया जाएगा. इसका उद्देश्य यह है कि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी को समझे और उस अनुरूप काम करे. यह तरीका भारतीय राजनीति में एक अनोखा प्रयोग है, जिसकी अब तक कोई मिसाल नहीं मिलती.
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