डेस्क- सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर बिहार में मतदाता सूची में संशोधन के लिए विशेष अभियान (एसआईआर) चलाने के निर्वाचन आयोग के निर्देश को चुनौती दी गई है. यह याचिका एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने दायर की है.
एडीआर ने अपनी दलील में कहा है कि अनुमान के अनुसार 3 करोड़ से ज्यादा मतदाता और विशेष रूप से वंचित समुदायों (एससी, एसटी और प्रवासी मजदूर) से आने वाले मतदाता एसआईआर आदेश में शामिल की गई सख्त आवश्यकताओं के कारण मतदान से बाहर हो सकते हैं.
याचिका में कहा गया है, “बिहार से मौजूदा रिपोर्ट, जहां एसआईआर पहले से ही चल रही है, दिखाती है कि गांवों और वंचित समुदायों के लाखों मतदाताओं के पास वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने के लिए मांगे जा रहे दस्तावेज नहीं हैं.”
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याचिका में कहा गया है कि दस्तावेज जमा करने आवश्यकता, उचित प्रक्रिया का अभाव और बिहार में एसआईआर की कम समयसीमा के कारण इस प्रक्रिया से लाखों सही मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हट जाएंगे, जिससे वे मताधिकार से वंचित हो जाएंगे.
याचिका में कहा गया है, “चुनाव आयोग द्वारा 24 जून को जारी किए गए आदेश ने मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की जिम्मेदारी राज्य से हटाकर नागरिकों पर डाल दी है. इसमें आधार या राशन कार्ड जैसे पहचान के दस्तावेजों को शामिल नहीं किया गया है, जिससे हाशिए पर पड़े समुदायों और गरीबों के मतदान से वंचित होने की संभावना और बढ़ गई है.”
याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग ने नवंबर 2025 में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बिहार में एसआईआर करने के लिए अनुचित और अव्यवहारिक समयसीमा जारी की है.
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याचिका में कहा गया, “लाखों नागरिक हैं जिनके पास एसआईआर आदेश के तहत जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, ऐसे कई लोग हैं जो दस्तावेज हासिल करने में सक्षम हो सकते हैं लेकिन निर्देश में दी गई छोटी समयसीमा उन्हें तय समय के भीतर इसे उपलब्ध करने से रोक सकती है.”
याचिका में कहा गया है, “जिस तरह से चुनाव आयोग ने एसआईआर करने का निर्देश दिया है वह अवैध, मनमाना है और इसने सभी हितधारकों, खासकर मतदाताओं पर सवाल खड़े किए हैं.
इसके अलावा, 29 अक्टूबर, 2024 और 6 जनवरी, 2025 के बीच विशेष सारांश संशोधन पहले ही किया जा चुका है, जिसमें मृत्यु या अन्य कारणों से प्रवास और अयोग्य मतदाताओं जैसे मुद्दों का समाधान किया गया है.
इस प्रकार, इतने कम समय में चुनावी राज्य में इतनी कठोर प्रक्रिया का कोई कारण नहीं है, जिससे लाखों मतदाताओं के वोट के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है.”








