रांची- रांची में आज बड़े ही धूम-धाम से रथयात्रा की शुरुआत हो चुकी है. अगले नौ दिनों तक भगवान जगन्नाथ मौसीबाड़ी यानी अपनी मौसी के घर में रहेंगे. इस दौरान वहीं उनकी पूजा-अर्चना होगी.
रथयात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ भाई बलभद्र और सुभद्रा के साथ सिंहासन पर विराजमान होकर अपनी मौसी के घर जाते हैं और नौ दिन वहां रहते हैं. इस अवसर पर झारखंड की राजधानी रांची में विशाल मेले का आयोजन होता है, जो 333 साल पुराना है. इस मेले की खासियत यह है कि यहां झारखंडी परंपरा के दर्शन होते हैं.
रांची में भगवान जगन्नाथ की पूजा तो पुरी के तर्ज पर ही होती है, लेकिन यहां जो भोग लगाया जाता है, उसमें झारखंडी परंपरा की झलक मिलती है. सुबह भगवान को सूजी का हलवा, दोपहर में दाल, भात और मौसमी सब्जी और रात को छिलका रोटी का भोग लगाया जाता है. छिलका रोटी चावल से बनायी जाने वाली खास तरह की रोटी है, जिसका प्रयोग झारखंड के आदिवासी और मूलवासी अपने भोजन में करते हैं.
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