सिमडेगा- लद्दाख में लैंड स्लाइड की चपेट में आकर सिमडेगा के वीर सपूत हवलदार किशोर बाड़ा शहीद हो गए. आज सेना द्वारा हवलदार किशोर बाड़ा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव ननेसेरा तुरतुरी पानी लाया गया. उनका पार्थिव शरीर पहुंचते ही पूरे इलाके का माहौल गमगीन हो गया. सैकड़ों लोग उन्हें देखने उनके गांव पहुंचे.
किशोर का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही हर तरफ चीख पुकार मच गई. गांव के लाल की एक झलक पाने के लिए सैकड़ों लोग उमड़ पड़े. पैतृक गांव में धार्मिक सामूहिक समारोह के बाद शहीद जवान को रांची मिलिट्री स्टेशन के जवानों ने अंतिम सलामी दी.
किशोर की बड़ी बहन मारियाना बाड़ा बताती हैं कि शहीद किशोर बाड़ा बिना मां के बड़े हुए. उनकी मां का निधन बचपन में ही हो गया था. करीब 5 साल पहले उनके पिता की भी मौत हो गई थी. बचपन से ही उन्होंने अपनी बहन और भाई का मां की तरह ख्याल रखा.
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काफी मुश्किलों के बाद किशोर को नौकरी मिली थी. वह पूरे परिवार का इकलौता सहारा था. तीन बड़ी बहनों की शादी हो चुकी थी. लेकिन एक छोटी बहन अभी अविवाहित है.किशोर बाड़ा तीन बड़ी और एक छोटी बहनों के बीच इकलौते भाई थे. वर्ष 2000 में किशोर की शादी संहिता मिंज से हुई थी।
शहीद जवान किशोर अपने पीछे पत्नी संहिता मिंज और तीन बेटियों अनीशा बाड़ा, एंजल बाड़ा और एंजेलिना बाड़ा को छोड़ गए हैं. अंतिम संस्कार से पहले तीनों बेटियों ने अपने पिता को आखिरी सलामी दी.
मारियाना कहती हैं कि भाई के चले जाने से उसे दुख तो है, लेकिन उन्हें इस बात का गर्व भी है कि उनका भाई देश की सेवा करते हुए शहीद हुआ है. भविष्य में उनके परिवार का कोई बच्चा देश की सेवा करना चाहेगा तो वह उसे भी जरूर भेजेंगी.
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