डेस्क- असम के गुवाहाटी के पान बाजार पुलिस स्टेशन में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। BNS की धारा 152 के तहत इसे गैर जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है। FIR में आरोप है कि राहुल ने भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले बयान दिया है।
गुवाहाटी हाईकोर्ट के वकील चेतिया ने शिकायत में लिखा है कि एक ऐसे व्यक्ति का सार्वजनिक मंच से दिया गया बयान, जो वर्तमान में विपक्ष के नेता का पद संभाल रहा है, कोई साधारण राजनीतिक टिप्पणी नहीं है। एक वरिष्ठ राजनेता और लोकसभा नेताप्रतिपक्ष का सार्वजनिक मंच से इस तरह का बयान देना देश की अखंडता और संप्रभुता के खतरे वाली है।
FIR में यह भी दावा किया कि राहुल गांधी की यह टिप्पणी बार-बार चुनावों में मिल रही हार की हताशा से प्रेरित थी। चेतिया ने कहा- विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी पर लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बनाए रखने की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके बजाय उन्होंने झूठ फैलाने और विद्रोह भड़काने के लिए अपने मंच का फायदा उठाना चुना, जिससे भारत की एकता और संप्रभुता खतरे में पड़ गई।
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उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीकों से जनता का विश्वास हासिल करने में असमर्थ होने के बाद, आरोपी अब केंद्र सरकार और भारतीय राज्य के खिलाफ असंतोष भड़काने की कोशिश कर रहा है।
दरअसल मोहन भागवत ने अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तिथि को ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ के रूप में मनाने का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि इस दिन देश को सच्ची स्वतंत्रता मिली, क्योंकि यह सदियों से दुश्मनों के आक्रमण झेलने वाले भारत के ‘स्व’ (स्वतंत्रता) की पुनर्स्थापना का प्रतीक है।
इसी बयान पर राहुल ने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी और RSS ने हर एक संस्थान पर कब्जा कर लिया है, और अब हम भाजपा, आरएसएस और भारतीय राज्य से ही लड़ रहे हैं।
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