डेस्क- आज शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरुप देवी ब्रह्मचारिणी का पूजन किया जाता है। ब्रह्मचारिणी का अर्थ होता है, तप का आचरण करने वाली।
इनका का स्वरूप अत्यंत तेजमय और भव्य है। इनके वस्त्र श्वेत हैं। मां ब्रह्मचारिणी अपने दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल धारण करती हैं।
इनकी आराधना से तप, संयम, त्याग व सदाचार जैसे गुणों की प्राप्ति होती है। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से धैर्य प्राप्त होता है और मनुष्य कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्त्तव्य से विचलित नहीं होता है, उसे विजय की प्राप्ति होती है।
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कहा जाता है कि हजारों वर्षों तक अपनी कठिन तपस्या के कारण ही इनका नाम तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी पड़ा। उन्हें त्याग और तपस्या की देवी माना जाता है।
अपनी इस तपस्या की अवधि में इन्होंने कई वर्षों तक निराहार रहकर और अत्यन्त कठिन तप से महादेव को प्रसन्न कर लिया। इनके इसी रूप की पूजा और स्तवन दूसरे नवरात्र पर किया जाता है।








