रांची- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू झारखण्ड दौरे पर हैं. शुक्रवार को राष्ट्रपति राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान के कार्यक्रम में शामिल हुईं. आज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान के 100 वर्ष पूरे होने पर नामकुम में शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया. जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल हुईं. इसके अलावा प्रदेश के राज्पपाल और सीएम हेमंत सोरेन भी शामिल हुए.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने झारखंड में राज्यपाल के रूप में अपने छह वर्षों के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि यहां के लोगों ने मुझे अपार स्नेह दिया है. लाह, रेजिन और गोंद की खेती से किसानों का जीवन स्तर सुधारा जा सकता है. राज्यपाल के रूप में अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि एक बार जब वे पलामू गयीं तो लोगों ने बताया कि उस इलाके का नाम पलामू भी बहुतायत में पलाश, लाह और महुआ की खेती की वजह से पड़ा.
राष्ट्रपति ने रांची स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सेकेंडरी एग्रीकल्चर के 100 वर्षों की यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस संस्थान ने लाह फार्मिंग, वैज्ञानिक तरीके से इसके उत्पादन और प्रसंस्करण में सराहनीय कार्य किया है. उन्हें झारखंड का राज्यपाल रहते हुए भी इस संस्थान में आने का मौका मिला था और उन्होंने पाया था कि इसने किसानों को प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया है.
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देश में लाह का 55 प्रतिशत उत्पादन झारखंड में होता है और इससे सबसे ज्यादा जनजातीय समुदाय के किसान जुड़े हैं. यह संस्थान उनका जीवन स्तर सुधारने में मददगार बना है. उन्होंने कहा कि आज फार्मास्यूटिकल्स एवं कॉस्मेटिक्स उद्योग में उच्च गुणवत्ता वाले लाह की मांग है. उन्हें उम्मीद है कि यह संस्थान इस दिशा में काम करेगा. इससे लाह उत्पादन करने वाले किसानों की आय में वृद्धि होगी.
राष्ट्रपति ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सेकेंडरी एग्रीकल्चर के अधिकारियों और वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे ऐसी तकनीक को विकसित करने की दिशा में काम करें, जिससे किसान अपनी सब्जियों को ज्यादा से ज्यादा समय तक संरक्षित और ताजा रख सकें.
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